(N/A) प्रकाश के लिए डॉप्लर प्रभाव प्रकाश के स्रोत और प्रेक्षक के बीच सापेक्ष गति के कारण प्रकाश की प्रेक्षित आवृत्ति (या तरंगदैर्ध्य) में होने वाला परिवर्तन है।
जब स्रोत प्रेक्षक से दूर जाता है,तो तरंगाग्रों को अधिक दूरी तय करनी पड़ती है,जिससे क्रमिक तरंगाग्रों के आगमन के बीच का समय अंतराल बढ़ जाता है। इसके परिणामस्वरूप प्रेक्षित आवृत्ति में कमी आती है और तरंगदैर्ध्य में वृद्धि होती है,जिसे 'रेड शिफ्ट' कहा जाता है।
जब स्रोत प्रेक्षक की ओर आता है,तो तरंगाग्र कम अंतराल पर पहुँचते हैं,जिससे प्रेक्षित आवृत्ति में वृद्धि होती है और तरंगदैर्ध्य में कमी आती है,जिसे 'ब्लू शिफ्ट' कहा जाता है।
प्रकाश के लिए डॉप्लर विस्थापन का सूत्र है:
$\Delta \nu = -\nu \frac{v_{radial}}{c}$
जहाँ $\Delta \nu$ आवृत्ति में परिवर्तन है,$\nu$ मूल आवृत्ति है,$v_{radial}$ दृष्टि रेखा के अनुदिश स्रोत का सापेक्ष वेग है,और $c$ प्रकाश की गति है।
आवृत्ति में आंशिक परिवर्तन:
$\frac{\Delta \nu}{\nu} = -\frac{v_{radial}}{c}$